बीदासर। श्रावण मास की पूर्णिमा रक्षाबंधन के पावन अवसर पर श्रावणी उपाकर्म एवं यज्ञोपवीत पूजन कार्यक्रम बाल बाड़ी को पीछे स्थित ‘ऋषि कृपा’ सदन में वैदिक मंत्रोच्चार और वेद पाठ के साथ संपन्न हुआ ।
पंडित चंद्रशेखर दाधीच ने विधि-विधानपूर्वक यज्ञोपवीत पूजन संपन्न करवाया। इस दौरान जनेऊधारी ब्राह्मण समाज के सदस्यों ने पुराने यज्ञोपवीत का त्याग कर विधि-विधान के साथ नया यज्ञोपवीत धारण किया तथा ऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
श्रावणी उपाकर्म को सनातन परंपरा में वार्षिक प्रायश्चित एवं आत्मशुद्धि का पर्व माना जाता है। इस अवसर पर व्यक्ति अपने आचरण का आत्ममंथन करते हुए धार्मिक एवं सामाजिक कर्तव्यों के पालन का संकल्प लेता है।
तीन ऋणों की याद दिलाता है यज्ञोपवीत
कार्यक्रम अध्यक्ष रामचन्द्र शर्मा ने बताया गया कि यज्ञोपवीत के तीन धागे जीवन के तीन प्रमुख कर्तव्यों एवं ऋणों का प्रतीक माने जाते हैं—देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण। यज्ञोपवीत धारण व्यक्ति को इन कर्तव्यों के प्रति सदैव सजग रहने की प्रेरणा देता है।
पूजन के पश्चात हवन, आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान पंडित चंद्रशेखर दाधीच, पंडित राजाराम चोटिया, संतोष चोटिया एवं पंडित अनिल कुमार शर्मा ,भीष्म महाराज सहित ब्राह्मण समाज के सदस्य मौजूद रहे। श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठान में उत्साह एवं श्रद्धा के साथ भाग लिया।
